इंडियन आर्मी, जो अपने अनुशासन और समर्पण के लिए जानी जाती है, में देशद्रोह, जासूसी या विद्रोह जैसे गंभीर मामलों में सख्त दंड के प्रावधान हैं। सेना के जवानों की जिंदगी और उनकी जिम्मेदारियों पर आधारित कई फिल्में और सोशल मीडिया पोस्ट भले ही उनके जीवन की झलक दिखाती हैं, लेकिन इनमें सेना के नियमों की पूरी जानकारी नहीं दी जाती। खासकर, सेना में गद्दारी की सजा और उससे जुड़े नियमों की सही जानकारी बहुत ही सीमित है।
देश से गद्दारी करने पर कड़ी सजा
सेना में गद्दारी का सबसे बड़ा अपराध दुश्मन देश के साथ संपर्क साधना या खुफिया जानकारी लीक करना माना जाता है। ऐसे मामलों में सेना अपने जवानों को कोर्ट मार्शल के तहत कड़ी सजा देती है। ये सजा कारावास से लेकर मौत तक हो सकती है। इसका उद्देश्य न केवल अनुशासन बनाए रखना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी प्रकार से खतरे में न पड़े।
विद्रोह के लिए उकसाने पर क्या होता है?
यदि कोई सैन्यकर्मी अपने साथियों को विद्रोह के लिए उकसाता है या सैन्य अनुशासन को तोड़ने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में दोषी को 10 साल तक की जेल, आजीवन कारावास, और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। ये नियम इंडियन आर्मी एक्ट के तहत बनाए गए हैं ताकि सेना के भीतर अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा बनी रहे।
देशद्रोह के मामलों में कठोर दंड
भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या किसी प्रकार का देशद्रोह करने वाले मामलों में आजीवन कारावास, जुर्माना, और बर्खास्तगी जैसे दंड दिए जाते हैं। सेना के जवानों को यह सिखाया जाता है कि वे हर परिस्थिति में अपने देश के प्रति निष्ठावान रहें। यदि किसी पर इस तरह का आरोप लगता है, तो उसके खिलाफ एक विस्तृत जांच प्रक्रिया अपनाई जाती है।
कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का महत्व
जब किसी सैन्यकर्मी पर कोई गंभीर आरोप लगता है, तो उसकी जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (CoI) गठित की जाती है। यह एक स्वतंत्र प्रक्रिया होती है, जिसमें सभी तथ्यों और परिस्थितियों का गहराई से अध्ययन किया जाता है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट पेश की जाती है, और उसी के आधार पर सजा तय की जाती है।
दोषी पाए जाने पर बर्खास्तगी और अन्य दंड
यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषी सैन्यकर्मी को बर्खास्त कर दिया जाता है। इसके साथ ही भविष्य में उसे मिलने वाली पेंशन और अन्य सुविधाओं पर भी रोक लगाई जा सकती है। इन दंडों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेना में अनुशासन और ईमानदारी का पालन हर हाल में हो।